ख़ास होती है हल्द्वानी की प्राचीन रामलीला

देहरादून: रामलीला का कैकई और दशरथ संवाद सबसे एहम संवाद माना जाता है क्योंकि इसी संवाद के बाद प्रभु श्री राम पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास के लिए वन की तरफ चले गए थे।

उत्तराखण्ड में इन दिनों मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के जीवन पर आधारित रामलीला का मंचन जगह-जगह देखने को मिल रहा है, तो वहीं हल्द्वानी में भी 139 साल से अधिक प्राचीन रामलीला का मंचन शुरू हो चुका है। इस रामलीला में वृंदावन के कलाकारों के साथ ही स्थानीय कलाकार भी बढ़-चढ़कर रामलीला के विभिन्न पात्रों का अभिनय कर रहे हैं।

हल्द्वानी की प्राचीन रामलीला में कैकई-मंथरा संवाद से लेकर दशरथ-कैकई संवाद का मंचन दर्शकों को भाव-विभोर करने वाला होता है। रामलीला के पिछले कुछ दिनों के मंचन में कैकई ने अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या की राजगद्दी और प्रभु श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा, वनवास की बात सुनकर राजा दशरथ मूर्छित होकर गिर पड़े और प्रभु श्रीराम उनका आशीर्वाद लेकर 14 वर्ष के वनवास पर निकल गए।

इस लीला के मंचन को देखकर दर्शक भावुक हो गए, वहीं रामलीला कमेटी के आयोजकों का कहना है कि कुमाऊँ की सबसे प्राचीन रामलीला में से एक हल्द्वानी की रामलीला बहुत ही शानदार तरीके से होती है जिसमें वृंदावन के कलाकारों के साथ ही स्थानीय कलाकार भी रामलीला के विभिन्न पात्रों का अभिनय करते हैं।

आयोजकों का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का पूरा जीवन ही अपने आप में एक आदर्श और हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है और हमें उनके जीवन के आदर्शों पर चलकर समाज की सेवा करनी चाहिए।

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