विकासनगर: श्वान शावक की हत्या में गिरफ़्तारी; पर क्या हो सकेगा इन्साफ?

इस पूरे प्रकरण की गवाह रहीं सौम्या बजाज ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए नन्हे 5 माह के श्वान के लिए आवाज़ उठायी और आरोपी के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करायी।

ख़ास बात:

  • विकास नगर में श्वान के 5 माह के शावक की हत्या का मामला
  • पशु क्रूरता अधिनियम में मुकदमा दर्ज
  • अधिवक्ता के घर पर हुई हत्या
  • पशु प्रेमी सौम्या बजाज ने उठायी आवाज़

नोट: विडियो में भूलवश श्वान की उम्र 5 वर्षीय बोली गयी है, जबकि असल में श्वान का बच्चा मात्र 5 माह का था।

देहरादून: सोशल मीडिया पर भारत के एक कोने में फल में पटाखे रखकर मार दी गयी एक हथिनी की व्यथा लगभग सभी ने देखी। ऐसे किस्से अब आम होते जा रहे हैं। मानो लोग अपनी कुंठा, अपना क्रोध, अपनी ऋणात्मक ऊर्जा को इन मासूम, बेजुबानों पर निकाल रहे हैं।

देहरादून को हमेशा से एक पशु-प्रेमी शहर के रूप में जाना जाता रहा है। यहाँ के लोगों में पशु-प्रेम मानिये विरासत में है। लेकिन एक चौंका देने वाला हादसा शायद आपने भी हाल में सोशल मीडिया पर देखा होगा जहाँ विकास नगर की सिंगरा कॉलोनी में एक अधिवक्ता के घर पर एक बेजुबान श्वान को मार दिया गया।

इस पूरे प्रकरण की गवाह रहीं सौम्या बजाज ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए नन्हे 5 माह के श्वान के लिए आवाज़ उठायी और आरोपी के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करायी… सौम्या की तहरीर पर अधिवक्ता के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। हम आपको सुनवाते हैं सीधे सौम्या से कि क्या हुआ था उस रोज़… जब वो उस नन्हे श्वान के साथ खेल रहीं थीं और 3 मिनट के अन्दर इस घटना को अंजाम दिया गया। (देखें विडियो)

एक अधिवक्ता के घर में गलती से घुसे एक नन्हे बेजुबान जानवर को अपनी ज़िन्दगी गंवानी पड़ी… क्योंकि वो सामने खड़े इस वकील की कानून की समझ और उसके रसूख को नहीं भाँप सका… नहीं जान सका कि इस देश में जानवरों के अधिकार सिर्फ संविधान की धाराओं में ही ताकतवर हैं और ज़मीनी स्तर पर आते आते वो कमज़ोर हो जाते हैं।

पुलिस ने फिलहाल अधिवक्ता के घर पर काम करने वाले मुलाजिम को गिरफ्तार कर लिया है जिसने आश्चर्यजनक रूप से ये भी स्वीकारा है कि उसने इससे पहले 5 अन्य छोटे श्वान शावकों को पानी में फ़ेंक दिया था।

इस केस में सौम्या को पूरी ताकत लगा कर लड़ना पड़ा, क्योंकि सोच तो वही है – कि जानवर ही तो है।  खैर अब मुकदमा तो दर्ज हो गया है, लेकिन इस पर आरोपी को क्या सजा होगी ये देखने वाली बात है।  वो कब तक सजा भुगतेगा और सजा के बाद भी क्या उसका मानसिक चरित्र बदल पायेगा? क्या उसका केस दूसरों के लिए एक सबक हो पायेगा? क्या रसूख वालों को यूँ हो पशुओं के अधिकारों से खेलने दिया जायेगा? इसकी गवाह तारीख हो बनेगी।

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